1 वॉलेंटियर की तबियत बिगड़ने के कारण ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन के ट्रायल रुके।
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कोरोना महामारी के शुरुआत के साथ ही विश्व के कई देश इसकी वैक्सीन निर्माण कार्य में दिन रात लगे हुए हैं। कई देशों को इस क्षेत्र में सफलता भी मिलती नजर आयी है। वैक्सीन बनाने में इस समय सबसे आगे रूस और ब्रिटेन जैसे देश चल रहें हैं। जहां रूस ने बिना तीसरे ट्रायल के ही अपनी वैक्सीन लॉन्च करने की घोषणा कि थी। लेकिन ब्रिटेन ने तीसरे ट्रायल में कुछ ऐसा देखा कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन के ट्रायल को रोक देने का निर्णय लिया। जी हाँ ब्रिटेन ने अपनी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन के ट्रायल को एक व्यक्ति के बीमार पड़ने के बाद रोकने का निर्णय लिया है। अब तक की ज्ञात हुई जानकारी के मुताबिक ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन के तीसरे ह्यूमन ट्रायल के दौरान एक व्यक्ति की वैक्सीन लेने के कुछ दिनों बाद तबियत तेजी से बिगड़ने लगी। जाँच करने पर यह बात सामने आई है कि वैक्सीन के कारण व्यक्ति को गंभीर साइड-इफेक्ट्स हुए हैं। इसी आधार पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन के ट्रायल को फिलहाल रोक दिया गया है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन
courtesy google

इस वैक्सीन को ब्रिटिश-स्वीडिश कंपनी एस्ट्राजेनिका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी साथ मिलकर तैयार कर रहे हैं। इससे पहले भी एक बार वैक्सीन के ट्रायल को कुछ कारणों से रोकना पड़ता था। ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन से विश्व के कई देशों की उम्मीद बंधी हुई है। इसलिए सभी की नजर इसके तीसरे ट्रायल पर लगातार बनी हुई थी। हमारे देश भारत की बात करें तो यहाँ भी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन के ट्रायल शुरू किए जा चुके थे। लेकिन ब्रिटेन में एक व्यक्ति को वैक्सीन लगवाने के बाद उसकी तबियत बिगड़ जाने के कारण अब इसके ट्रायल को अस्थायी तौर पर रोक दिया गया है।

वैक्सीन के ट्रायल के दौरान एक व्यक्ति के बीमार पड़ जाने पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने कहा है कि यह एक सामान्य स्थिति है। वॉलेंटियर बीमार पड़ने की वजह की स्वस्तंत्र जाँच की जाएगी। जाँच के परिणाम आने के बाद वैक्सीन की सेफ्टी सुनिश्चित करने के बाद ही इसका फिर से ट्रायल शुरू किया जाएगा। बता दें कि अपने अब तक के हुए सभी ट्रायल में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन ने उम्मीद के मुताबिक परिणाम दिए हैं। जिन लोगों को यह वैक्सीन दी गयी उन लोगों की शरीर में एंटीबॉडीज और T-सेल का निर्माण तेजी से हुआ। यह वैक्सीन व्यक्ति की इम्युनिटी क्षमता को बढ़ाने का कार्य करती है।

अब तक हो चुके कोरोना वायरस की दवा बनाने के दावे 

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