क्या वाकई रूस ने तैयार कर ली विश्व की पहली कोरोना वैक्सीन? पढ़े खास रिपोर्ट।
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विश्व में लम्बे समय से लगातार बढ़ रहे कोरोना वायरस पर रोक लगाने के लिए, पिछले लम्बे समय से विश्व के सभी देश जुटे हुए हैं। अब तक विश्व के कई देशों ने वायरस की रोकथाम के लिए वैक्सीन बनाने का दावा भी पेश किया है। हालाँकि अभी तक वैक्सीन को लेकर जितने देशों ने दावा किया, उन सभी की वैक्सीन अभी ह्यूमन ट्रायल फेज में हैं। बता दें कि कोई भी वैक्सीन को फाइनल अप्रूवल से पहले क्लिनिकल और ह्यूमन ट्रायल फेज के सभी चरणों को सफलता पूर्वक पार करना होता है। कोरोना की वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल की बात करें तो इसमें रूस सबसे आगे निकलता हुआ नजर आ रहा है। रूस ने हाल ही में दावा किया है कि उसने विश्व की पहली कोरोना वैक्सीन को सफलता पूर्वक बना लिया है। रूस के मुताबिक वैक्सीन ने ह्यूमन ट्रायल के सभी चरणों को सफलता पूर्वक पार कर लिया है। बता दें कि रूस के कोरोना वैक्सीन के बनाने के दावे पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से भी अभी तक कोई जानकारी नहीं शेयर की गई है। ऐसे में अभी यह कहना शायद जल्दबाजी होगा कि रूस ने विश्व को कोरोना से लड़ने के लिए पहली वैक्सीन दे दी है।

रूस कोरोना वैक्सीन
courtesy google

क्या वाकई रूस ने कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन तैयार कर ली?
रूस (Russia) की सेचेनोव मेडिकल यूनिवर्सिटी (Sechenov Medical University) ने दावा किया है कि उनकी वैक्सीन ने वॉलंटियर्स पर ह्यूमन ट्रायल के सभी चरणों को पूरा कर लिया है। सेचेनोव यूनिवर्सिटी में हुए इस परीक्षण के प्रमुख शोधकर्ता इलीना स्मोलयारचुक (Elena Smolyarchuk) ने रूसी न्यूज एंजेंसी टास (TASS) को इस बारे में जानकरी देते हुए बताया कि परीक्षण के जो फाइनल नतीजे निकल कर सामने आये हैं उनमें हमें सफलता प्राप्त हुई है। न्यूज एजेंसी से बात करते हूए उन्होंने कहा कि हमने वैक्सीन शोध के कार्य को पूरा कर लिया है। जिसके पहले बैच को 15 जुलाई और दूसरे बैच को 20 जुलाई को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि यदि वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के बाद यदि कोई समस्या नजर नहीं आयी, तो दुनिया को जल्द ही कोरोना की पहली वैक्सीन मिल जाएगी।

गेमाली इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी द्वारा तैयार कि गयी है वैक्सीन
बता दें कि रूस की सेचेनोव मेडिकल यूनिवर्सिटी (Sechenov Medical University) में जिस वैक्सीन से परीक्षण किया जा रहा है। उसे गेमाली इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी (Gamalei Institute of Epidemiology and Microbiology) द्वारा तैयार किया गया है। इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसलेशनल मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी (Institute for translational medicine and biotechnology) के प्रमुख वदिम तरासोव (Vadim Tarasov) ने बताया कि जिन वॉलेंटियर पर वैक्सीन का परीक्षण किया गया था, उनके पहले बैच को 15 जुलाई और दूसरे बैच को 20 जुलाई को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।

WHO से अनुमति मिलना जरुरी
हालाँकि रूस ने विश्न की पहली सफल कोरोना वायरस वैक्सीन बनाने का दावा कर दिया है लेकिन उसे अभी कुछ और बाधाओं को पार करना जरुरी है। रूस को वैक्सीन से संबंधित रिसर्च और अन्य सभी डिटेल्स को WHO के सामने पेश करना जरुरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि वैक्‍सीन डेवलपमेंट से संबंधित प्रोग्राम्‍स को WHO मॉनिटर कर रहा है, इस वजह से भी वैक्‍सीन को जल्‍द ग्‍लोबल अप्रूवल मिलना मुश्‍किल है। बता दें कि WHO की 7 जुलाई को जारी हुई लिस्ट के मुताबिक अभी तक सिर्फ 2 वैक्सीन ऐसी हैं, जो स्टेज-3 ट्रायल तक पहुंच पाई हैं। इसमें पहली वैक्सीन चीन की Sinovac और दूसरी है University of Oxford की ChAdOx1 nCoV-19 वैक्सीन।

अब तक हो चुके कोरोना वायरस की दवा बनाने के दावे 

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