अस्‍थमा के मरीजों को मानसून के मौसम में भूलकर भी नहीं करनी चाहिए ये गलतियाँ।
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मानसून का मौसम अपने साथ सर्दीं खासी और वायरल जैसी अनेक समस्याओं को साथ लेकर आता है। इसलिए इस मौसम में आपको कहीं अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता पड़ती है। खासकर जो लोग अस्‍थमा और सांस संबंधी रोगों से ग्रसित हैं उन्हें मानसून के इस मौसम में अपनी एक्स्ट्रा केयर करने की जरूरत होती है। आपके द्वारा की गई छोटी सी गलती भी आपको मानसून के मौसम में खतरे में धकेल सकती है। यदि आपको भी अस्‍थमा और सांस से संबंधित कोई बीमारी है, तो मानसून के मौसम में आप कुछ छोटी-छोटी सावधनियों को अपनाकर खुद को बीमार पड़ने से बचा सकते हैं। आईये जानते हैं अस्‍थमा और सांस के मरीजों को मानसून के मौसम में कौन सी खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

अस्‍थमा मानसून के मौसम
courtesy google

मानसून और अस्थमा-

इस बात में कोई दोराय नहीं कि चिलचिलाती गर्मी और पसीने के बाद जब मानसून की बारिश जब होती है तो सबके चेहरे खिल उठते हैं। लेकिन मन को प्रसन्न करने वाला यह मानसून कई मायनों में खतरनाक भी साबित होता है। मानसून के इस मौसम में अनेक प्रकार के संक्रमण और फ्लू हो जाने का खतरा कहीं अधिक बढ़ जाता है। अस्थमा रोगियों के लिहाज से बात करें तो उनके लिए यह मौसम अनुकूल नहीं होता है। इस मौसम में अस्थमा, श्वसन संबंधी समस्याओं और अन्य एलर्जी से पीड़ित लोगों को फूंक-फूंक के कदम रखना पड़ता है। थोड़ी सी लापरवाही भी बीमार करने के लिए प्रयाप्त होती है। कुछ अस्थमा रोगियों को यह लगता है कि महज धूल मिट्टी के संपर्क में आने मात्र पर ही उन्हें अधिक समस्या का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन आपकी ये भूल आपको मानसून के मौसम में खतरे में डाल सकती है। आज हम चर्चा करेंगे उन टिप्स के ऊपर जिनको फॉलो कर अस्थमा रोगी मानसून में खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

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पालतू जानवरों से दूरी बनाएं –

इस मौसम में उन लोगों के घरों में कम से कम जाएँ जिनके पास कोई पालतू जानवर हो। यदि आपके खुद के पास पालतू जानवर है, तो इसमें कोई शक नहीं कि वह आपको बहुत प्यारा होगा। लेकिन अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा के कारण इस मौसम में उनसे दूरी बनाएं रखें। ऐसा इसलिए क्योंकि पशु डैंडर यानि कि पालतू बाल वैक्यूम करने के बाद भी नहीं हटते हैं। आपके पालतू जानवर के ये बाल आपको परेशानी दे सकते हैं और एलर्जी का कारण बन सकते हैं।

इनडोर पलांटस को कमरे में न रखें –

कई लोगों को अपने घर के अंदर प्लांट रखने का बहुत शौक होता है और ये लोग घर में बेडरूम से लेकर लॉबी तक में कई तरह के पौधें रखना पसंद करते हैं। लेकिन आपको बता दें कि मानसून के मौसम में इन्हें अपने कमरे से बाहर करने में ही आपकी भलाई है। रिसर्च के मुताबिक मानसून के इस मौसम में हवा में पराग कणों की उपस्थिति बढ़ जाती और पराग कण अस्थमा के हमलों को और अधिक सक्रिय कर सकते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि इस मौसम में अपने रूम से पौधों को न रखें। इसके अलावा इस मौसम में फूलों के गार्डन, पार्क और जंगल में जाने से बचें।

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दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें-

इस मौसम में हवा में नमी के साथ अन्य कई प्रकार के खतनाक वायरस भी घूमते हैं, इसलिए बेहतर होगा आप अपने घर की दरवाजों और खिड़कियों को बंद रखें। हवा में मौजूद ये वायरस श्वसन प्रक्रिया के दौरान हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं और हमे बीमार कर देते हैं। इसलिए इस मौसम में घर की उन सभी जगहों जहां पर पानी का काम अधिक होता हो जैसे की किचन, वॉश एरिया या बाथरूम की अच्छी तरह से साफ करें और इसे ड्राई रखने की कोशिश करें। समय समय पर एग्जॉस्ट फैन चला कर नमी को घर से बाहर निकाल दें। इस मौसम में सदैव मास्क का प्रयोग करें।

दीवारों की सीलन को रोकें-

मानसून के मौसम में अत्यधिक बारिश के चलते दीवारों में सीलन आ जाना आम समस्या बन जाती है। इसलिए इस मौसम में घर की दीवारों पर सीलन रोधी ट्रीटमेंट करवाएं। दीवारों की यह नमी अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकती है साथ ही यह अनेक तरह की श्वसन समस्याएं भी पैदा कर सकती हैं। आप चाहें तो इस मौसम में दीवारों पर नम-प्रूफ करवा सकते हैं। इसके अलावा दीवारों पर एंटी-मॉइस्चर या एंटी-मोल्ड ब्लीच का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। बरसात इस मौसम में घर के अंदर के वतावरण को नियंत्रित करने के लिए एक अच्छे डीह्यूमिडिफ़ायर या एयर प्यूरीफायर का प्रयोग भी कर सकते हैं।

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खान-पान पर दें खास ध्यान-

इस मौसम में ठंडी चीजों और ठंडे पानी का सेवन करने से बचें। पानी को गुनगुना कर के पीएं। डीप फ्राइ फूड, मसाला और जंक फूड्स को इस मौसम में खाने से बचें। यदि आपका अस्थमा गंभीर है तो अपने डॉक्टर से सलाह लें और एक अनुकूल डाइट चार्ट बनवाएं।

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