ब्रिटेन में बंदरों पर चल रहे कोरोना वायरस वैक्सीन परीक्षण से मिले सकारात्मक परिणाम।
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कोरोना वायरस संक्रमण से पूरा विश्व इस समय जूझ रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए पिछले लम्बे समय से विश्व के सभी देश वायरस की रोकथाम हेतु वैक्सीन के ऊपर शोध कर रहे हैं। बता दें की कोरोना वायरस वैक्सीन के ऊपर चल रहे इस शोध में इजरायल और इटली को काफी हद तक सफलता भी मिली ही। लेकिन अभी भी कोरोना वायरस वैक्सीन पर कई तरह के अन्य शोध किये जाने बांकी हैं। इजरायल और इटली के बाद कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर पिछले लम्बे समय से ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में शोध कार्य चल रहा है। जिसके तहत कोरोना वायरस के खात्मे के लिए बनाई गयी वैक्सीन का परीक्षण छह बंदरों पर किए गया और इसके नतीजे काफी सकारात्मक रहे। हालांकि ब्रिटेन में कोरोना वायरस वैक्सीन का यह परीक्षण बेहद छोटे स्तर पर किया गया।

ब्रिटेन कोरोना वायरस वैक्सीन

courtesy google

बीबीसी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ब्रिटेन के कुछ शोधकर्ताओं ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स के माध्यम से बताया है कि “ब्रिटेन स्तिथ ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कोरोना वायरस वैक्सीन के ऊपर कार्य चल रहा है और इसके जो शुरुआती रुझान निकल कर सामने आये हैं वो बेहद आशा जनक हैं।” बता दें कि वैक्सीन के शुरुआती दौर के परीक्षण में शोधकर्ताओं ने छह बंदरों के एक समूह पर इस वैक्सीन का ट्रायल किया और उन्होने देखा कि इसके नतीजे उम्मीद के मुताबिक सकारात्मक रहे। शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि अब इस वैक्सीन का इंसानों पर परीक्षण किया जा रहा है। बता दें कि हाल ही में ‘ब्रिटेन की फार्मेसी कम्पनी AstraZeneca ने पिछले माह में बताया था कि उन्होंने ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप और जेनर इंस्टिट्यूट के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर कोरोना वायरस वैक्सीन के ऊपर काम शुरू कर दिया है।

बंदरों के ऊपर चल रहे इस शोध को लेकर शोधकर्ताओं ने बताया कि “बंदरों को कोरोना वायरस वैक्सीन की डोज देने के दौरान हमने पाया कि कुछ बंदरों के शरीर में इस टीके के कारण 14 दिनों के अंदर एंटीबॉडी विकसित हो गईं और कुछ बंदरों को अपने शरीर में एंटीबॉडी विकसित करने में 28 दिन का लम्बा समय लगा। “शोधकर्ताओं के मुताबिक, “बंदरों के कोरोना वायरस के संपर्क में आने पर, इस वैक्सीन ने उन सभी बंदरों के फेफड़ों को नुक़सान से बचाया और वायरस को शरीर में अपनी कॉपियाँ बनाने से रोकने का कार्य किया। हालाँकि इस दौरान शोधकर्ताओं ने इस बात को भी नोटिस किया कि वायरस अभी भी बंदरों कि नाक में सक्रिय था।”

किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर Dr Penny Ward के मुताबिक, ‘शोध के ये नतीजे सकारात्म रहे और इनका इंसानों पर परीक्षण होना चाहिए। इस शोध के बारे में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में वैक्सीनोलॉजी डिपार्मेंट की प्रोफेसर Sarah Gilbert ने कहा, ‘मुझे इस वैक्सीन के सफल परीक्षण का पूरा यकीन था और ऐसा ही हुआ। लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसन के प्रोफ़ेसर, डॉक्टर स्टीफ़न इवांस ने कहा कि ‘बंदरों पर शोध के बाद जो नतीजे आए हैं, वो निश्चित रूप से एक अच्छी ख़बर है.’ उन्होंने कहा, “यह ऑक्सफ़र्ड वैक्सीन के लिए एक बड़ी बाधा की तरह था जिसे उन्होंने बहुत अच्छी तरह से पार कर लिया है.”

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