कुंवारी लड़कियां ऐसे करें करवा चौथ का व्रत..भूल कर भी ना करें ये गलतियां।
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(Karva Chauth) करवा चौथ का व्रत हर साल हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को लिया जाता है। हिन्दू धर्म में इस व्रत को काफी महत्पूर्ण माना जाता है। करवा चौथ का यह व्रत सभी सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घ आयु कामना हेतु रखा जाता है किंतु हमारे देश में कई जगह ऐसी भी हैं जहाँ करवा चौथ का व्रत सिर्फ सुहागिन ही नहीं बल्कि कुँवारी लड़कियां भी रख सकती हैं। करवा चौथ का व्रत यदि कुँवारी लड़कियां रखती हैं तो फिर इसके नियमों में भी बदलाव आ जाता है।

आईये आज के इस आर्टिकल के माध्यम से जानते हैं कि यदि करवा चौथ का व्रत कोई कुँवारी लड़की द्वारा अपने होने वाले पति परमेश्वर या भविष्य में अच्छे वर मिलने कि कामना के लिए रखा जा रहा हो तो उसे व्रत के दौरान किन किन चीजों का ध्यान रखना बेहद ही जरूरी होता है साथ ही ये भी जानें कि कुँवारी लड़की द्वारा करवा चौथ का व्रत रखने पर किन किन नियमों में आ जाता है बदलाव।

करवा चौथ व्रत की कहानी | Karwa Chauth Vrat Katha In Hindi.

कुवांरी लड़कियों के लिए करवा चौथ व्रत के नियम –

करवा चौथ के व्रत का हिन्दू धर्म में काफी महत्त्व माना जाता है। यदि आप कुँवारी हैं और किसी के साथ रिलेशन में और भविष्य में उसके साथ शादी करने कि इच्छा रखती हो तभी आप करवा चौथ का व्रत रखें।

हमारे देश में कई जगह करवा चौथ का व्रत कुँवारी कन्याओं द्वारा रखने कि भी परम्परा चली आ रही है, ये सभी लड़कियाँ भविष्य में एक अच्छे पति मिलने कि कामना हेतु व्रत रखती हैं।

कुँवारी लड़कियां निहार व्रत (बिना कुछ खाये) रख सकती हैं, कुँवारी लड़कियां को निर्जल व्रत रखने की कोई आवश्यकता नहीं।

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सुहागन एवं कुँवारी दोनों को ही दिन भर के लिए अन्न नहीं ग्रहण करना होता है, शाम होने पर सुहागनें व्रत की रीती रिवाजों से पूजा करती हैं जबकि कुँवारी लड़कियां केवल करवा चौथ माता, भगवान शिव और माता गौरी की कथा पढ़ें।

कुँवारी लड़कियों को व्रत का समापन करने के लिए चाँद को देखने की जरूरत नहीं होती है इसकी जगह वो तारे को देख कर व्रत का समापन करें।

कुँवारी लड़कियां व्रत समापन के लिए छलनी से तारे को देखने की कोई जरूरत नहीं होती है, आप बिना छलनी के तारे को जल अर्घ्य देकर पूजन करें और व्रत का परायण करें।

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