Karva Chauth Vrat Ki Kahani: करवा चौथ व्रत की कहानी |
TRENDING
  • 10:24 PM » मेला पर 10 लाइन निबंध – 10 lines on mela in hindi.
  • 10:36 PM » घोड़े पर 10 लाइन निबंध – 10 lines on horse in hindi.
  • 8:57 PM » गौतम बुद्ध पर 10 लाइन निबंध – 10 lines on gautam buddha in hindi.
  • 8:13 PM » शीत ऋतू पर 10 लाइन निबंध – 10 lines on winter season in hindi.
  • 9:21 PM » डॉक्टर पर 10 लाइन निबंध – 10 Lines on Doctor in Hindi.

Karva chauth vrat ki kahani…त्यौहार कोई भी हो हर त्यौहार मानने के पीछे कोई न कोई कहानी जरूर होती है इन्ही में से एक है करवा चौथ। करवा चौथ का इंतजार महिलाओं को पूरे साल भर से रहता है। करवा चौथ का व्रत रख सुहागिन महिलायें अपने पति की लम्बी उम्र के लिए रखती हैं। ये भी मान्यता है की इस व्रत (Karva chauth vrat ki kahani) को रखने से पति पत्नी के संबंध परस्पर मजबूत होते हैं। ये व्रत सूर्य निकलने से पहले शुरू हो जाता है और जब तक चाँद न आए तब तक रहता है।

Karva chauth vrat ki kahani

courtesy google

करवा चौथ व्रत की कहानी – Karva chauth vrat ki kahani

ये तो हम सभी जानते हैं कि जो भी महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं, वो पूजा के दौरान करवा चौथ व्रत कथा (Karva chauth vrat ki kahani) भी सुनती हैं। क्या आप जानते हैं कि करवा चौथ व्रत के पीछे की कहानी? आईये पढें:

आज से कई साल पहले या ये कह लीजिए कि प्राचीन काल की बात है। इन्द्रप्रस्थपुर के एक शहर में वेदशर्मा नामक एक ब्राह्मण रहता था, जिसके सात लड़के और एक लड़की थी। सभी भाई बहनों का का परस्पर बहुत मधुर समबन्ध था। बेटी वीरावती के बड़े हो जाने पर पिताजी ने उसका धूम धाम से विवाह सम्पन्न करवा दिया।

एक बार की बात है ब्राह्मण की बेटी अपने ससुराल से मायके रहने आयी थी। शाम को जब सभी भाई रात्रि भोज ग्रहण करने के लिए बैठे तो उनकी बहन ने खाना खाने से इंकार कर दिया, पूछने पर बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है, इसलिए वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखने के पश्च्यात उसे अर्घ्‍य देकर ही खायेगी।

करवा चौथ 2019: जानिए करवा चौथ व्रत विधि, मुहूर्त, क्या रहेगा शुभ और क्या अशुभ।

चूंकि रात बहुत हो गयी थी और चंद्रमा अभी तक नहीं निकला नहीं था, इधर उनकी बहन दिन भर से भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी थी और मूर्छित होने के कगार पर आ गयी थी। सबसे छोटे भाई से अपनी बहन की यह हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पेड़ पर एक दीपक जलाकर छलनी की ओट में रख देता है। जिसे दूर से देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे चतुर्थी का चांद निकल आया हो।

इसके बाद भाई अपनी बहन से कहता है कि हे बहन चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे फूले नहीं समाती और सीढ़ियां चढ़कर छत से चांद को देखती है और उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है।

जैसी ही वह पहला टुकड़ा मुंह में डालती है उसके साथ अशुभ घटनाएं घटना प्रारम्भ हो जाती हैं, सबसे पहला कौर लेते ही उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालती है उसे ससुराल से बुलावा आ जाता है, और वहाँ पहुंचने पर वो अपने पति को मृत पाती है।

अपने ऊपर आये इस संकट की दशा में वो अपने सुध बुध खो देती है और यही सोचती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ, अपने पति के मृत शरीर को देखकर वह जोर जोर से विलाप करने लगी और खुद को अपनी किसी भूल के लिए दोषी ठहराने लगी। उसका विलाप सुनकर देवी इन्द्राणी जो कि इन्द्र देवता की पत्नी है उनका दिल पसीज गया और वह स्वयं सान्त्वना देने के लिए पहुँची।

कुंवारी लड़कियां ऐसे करें करवा चौथ का व्रत..भूल कर भी ना करें ये गलतियां।

उन्होंने उसे बताया कि (Karva chauth vrat ki kahani) करवा चौथ के दिन ही उसके पति की मृत्यु क्यों हुई। अपने पति को जीवित करने की वह देवी इन्द्राणी से विनती करने लगी। इस पर देवी ने उसे करवा चौथ के व्रत के साथ-साथ पूरे साल में हर माह की चौथ को व्रत करने की सलाह दी और उसे आश्वासित किया कि ऐसा करने से उसका पति जीवित लौट आएगा।

इसके बाद वीरावती सभी धार्मिक कृत्यों और मासिक उपवास (Karva chauth vrat ki kahani) को पूरे विश्वास के साथ करती है। अन्त में उन सभी व्रतों से मिले पुण्य के कारण वीरावती को उसका पति पुनः प्राप्त हो गया।

 

अगर आपको हमारे द्वारा दी गयी जानकारी पसंद आयी तो कृपया अपने दोस्तों, परिवार के सदस्यों के साथ शेयर जरूर करें. 

ऐसी महत्पूर्ण जानकारियों के लिए आज ही हमसे जुड़े :- 

Instagram
Facebook
Twitter
Pinterest

RELATED ARTICLES
LEAVE A COMMENT