इंटरनेशनल टी डे! कब मनाया जाता है चाय दिवस, जाने चाय का इतिहास और प्रकार?
TRENDING
  • 10:24 PM » गर्मियों के सीजन में करें इन सब्जियों और फलों के जूस को अपनी डाइट में शामिल।
  • 9:56 PM » क्रिकेट पर 10 लाइन निबंध : 10 lines on cricket in hindi.
  • 4:10 PM » सेब का जूस बनाने की विधि : Apple juice recipe in hindi.
  • 10:33 PM » तरबूज का जूस बनाने की रेसिपी – Watermelon juice recipe in hindi.
  • 11:33 PM » NDMA ने बताए गर्मियों में लू से बचने के उपाय – Tips to avoid heat stroke in summer in hindi.

15 दिसम्बर को हर साल इंटरनेशनल टी डे (international tea day) मनाया जाता है। इंटरनेशनल टी डे की शुरुवात पहली बार वर्ष 2005 हुए थी। पहला इंटरनेशनल टी डे भारतवर्ष की राजधानी दिल्ली में मनाया गया था। दूसरा इंटरनेशनल टी डे का आयोजन 15 दिसंबर 2006 में श्रीलंका में हुआ। इसी क्रम में आज विश्वभर के कई देशों जिनमें से कुछ प्रमुख वियतनाम, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, नेपाल, केन्या, उगांडा और तंजानिया आदि के अलावा कई अन्य दूसरे देशों में भी अंतर्राष्‍ट्रीय चाय दिवस मनाया जाता है।

चाय का इतिहास History of Tea –

प्रचीन चीनी गाथाओं के अनुसार, चाय का इतिहास आज से तकरीबन 2737 ई.पू. पुराना है। जब एक कुशल शासक और वैज्ञानिक सम्राट शेन नोंग (Shen Nong) ने गलती से चाय की खोज की। बगीचे में पानी उबालने के दौरान, एक जंगली चाय के पेड़ का एक पत्ता उनके बर्तन में चला गया। बादशाह ने पानी को पीने का इतना आनंद लिया कि वह पौधे पर आगे शोध करने के लिए मजबूर हो गया। किंवदंती है कि सम्राट ने अपने शोध के दौरान चाय के औषधीय गुणों की खोज की।

भारतीय चाय का इतिहास Indian Tea History-

भारत में चाय का इतिहास काफी पुराना है। सन 1815 में सर्वप्रथम कुछ अंग्रेज यात्रियों का ध्यान असम के स्थानीय कबीलों के द्वारा पिये जाने वाले एक पेय ने खिंचा यह असम में उगने वाली झाड़ियों की पत्तियों से बनाया जाता था। माना जाता है कि भारत में गवर्नर जनरल लॉर्ड बैंटिक ने 1834 में चाय की परंपरा शुरू की थी। इसका उत्पादन करने की संभावना तलाश करने के लिए उन्होंने एक समिति का गठन किया और सन 1835 में असम में जगह जगह चाय के बागान भी लगवाए।

इंटरनेशनल टी डे

courtesy google

चाय के मुख्य प्रकार Types of Tea –

ब्लेक टी (Black tea) – असम, दार्जिलिंग, सीलोन, नीलगिरि, श्रीलंका और केन्या में पाये जाने वाली ब्लैक टी की पत्तियाँ डार्क ब्राउन या ब्लक कलर की होती है। इस चाय को बनाने के लिए दूध का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, इसे पानी में उबाल कर या फिर चाय पत्ती को छलनी के ऊपर रख गर्म पानी डाल कर छान लिया जाता है।

ग्रीन टी (Green tea) – एंटीआक्सीडेंट गुणों से भरपूर ग्रीन टी वजन कम करने, चहरे में ग्लो लाने और कोलेस्टेरॉल के लेवल को मेंटेन करने का काम करती है। आजकल बाजार में कई सारी कंपनियों की ग्रीन टी मौजूद हैं। आप अपने टेस्ट के अनुसार अपने लिए परफेक्ट ग्रीन टी का चुनाव कर सकते हैं।

हर्बल चाय (Herbal tea) – हर्बल टी बनाने के लिए सिर्फ हर्ब्स यानि जड़ी बूटी का उपयोग किया जाता है। यह पूरी तरह से शुद्ध आयुर्वेदिक चाय होती है। यह जड़ी बूटियों से बनने वाली चाय है इसलिए यह कैफीन फ्री चाय होती है। सेहत के लिहाज से बेहद फायदेमंद होती है।

भूलकर भी मत पीजिये खाली पेट चाय! पड़ सकते हैं भारी मुसीबत में आप।

दूध वाली चाय (Milk tea) – रोज मर्रा की लाइफ में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली चाय होती है। इसे बनाने के लिए चायपत्ती को पानी में उबालने के बाद उसमे दूध मिला दिया जाता है। यह चाय हर भारतीय की पसंदीदा चाय में से एक है। इससे शरीर को तरोताजगी का अनुभव होता है।

व्हाइट टी (White tea) – यह एक ऐसी चाय है, जिसकी मांग काफी ज़्यादा है। यह उन छोटी युवा पत्तियों को तोड़कर बनती है, जिसकी कलियां पूरी तरह खिली भी नहीं होती। पत्तियों को सूखाकर इस चाय को बनाया जाता है, जो स्वाद में काफी मधुर और कोमल होती है।

ऊलौंग टी (Oolong tea) – यह स्वास्थ्य के लिहाज से अच्छी मानी जाती है। इसमें कैफीन की उच्च मात्रा पायी जाती है। यह कोलेस्ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित रखती है साथ दिल के मरीजों के लिए भी लाभदयक होती है। इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। इसका स्वाद अन्य चायों की तुलना में अलग होता है।

दोस्तों अगर आपको हमारे द्वारा दी गयी जानकारी पसंद आयी तो कृप्या अपने दोस्तों, परिवार के सदस्यों के साथ शेयर जरूर करें. 

ऐसी रोचक जानकारिओं के लिए आज ही हमसे जुड़े :-                                                          Instagram
Facebook
Twitter
Pinterest

RELATED ARTICLES
LEAVE A COMMENT