कोरोना संक्रमितों मरीजों के लिए लाइफलाइन बन रही है डेक्सामेथासोन दवा? पढ़े रिपोर्ट।
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कोरोना वैश्विक महामारी के प्रसार के साथ ही विश्व भर के सभी देश इसकी रोकथाम के लिए वैक्सीन बनाने के कार्य में दिन रात जुटे हैं। कोरोना की वैक्सीन को लेकर कई देशों से सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। हाल ही में ब्रिटेन की आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कोरोना संक्रमित मरीजों के ऊपर किये गए अध्ययन में एक स्टेरॉयड दवा के सफल परिणामों की चर्चा दुनियाभर में रही। जी हाँ हाल ही में ब्रिटेन की आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कोरोना वायरस के सफल इलाज के लिए डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) दवा को प्रभावी बताया गया है। ब्रिटेन में कोरोना के मरीजों के ऊपर चल रहे शोध में डेक्सामेथासोन दवा लेने वाले मरीजों की मौत की संख्या में एक तिहाई की कमी दर्ज की गयी। जिनमे ऐसे मरीज भी शामिल थे जिनकी हालत गंभीर या अतिगंभीर थी। स्टडी टीम के चीफ प्रो. मार्टिन लैंड्रे ने कहा कि डेक्सामेथासोन दवा को मरीजों को केवल 10 दिनों तक दिया जाता है। इस दवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि असर में कारगर होने के साथ यह बेहद कम कीमतों पर आसानी से हर किसी को उपलब्ध करवाई जा सकती है।

क्या है डेक्सामेथासोन दवा –

WHO के मुताबिक डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) एक स्टेरॉइड है जिसका प्रयोग सांस की समस्या, अस्थमा, एलर्जिक रिएक्शन, ऑर्थराइटिस, हार्मोन या इम्यूनिटी सिस्टम डिसऑर्डर और सूजन के इलाज के लिए वर्ष 1960 से किया जा रहा है। WHO ने वर्ष 1977 से डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) दवा को आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल कर लिया था।

क्या कहती है ब्रिटेन की आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च –

आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में 2,104 कोरोना संक्रमित मरीजों पर इस दवा का रिसर्च किया और इनकी तुलना 4,321 दूसरे ऐसे कोरोना संक्रमितों मरीजों से करी, जिनका सामान्य रूप से इलाज किया जा रहा था। इस रिसर्च के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) दवा के प्रयोग से ऐसे कोरोना संक्रमित मरीज जिनकी हालत गंभीर होने के कारण उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था, उनकी मृत्यु दर में 35 फीसदी तक की कमी आयी।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च के मुताबिक कोरोना वायरस के कारण कई मरीजों में साइटोकाइन स्टॉर्म की स्थिति बन जाती है। ऐसी कंडीसन में व्यक्ति का इम्यून सिस्टम अति सक्रिय होकर व्यत्कि के फेफड़ों को नुकसान पहुँचाने लगता है। इस दवा की सबसे बड़ी खासियत है कि यह साइटोकाइन स्टॉर्म की स्थिति को नियंत्रण में लाती है और फेफड़ों की कोशिकाओं को डैमेज करने वाली इम्यूनि कोशिकाओं को रोकती है।

कम कीमतों पर उपलब्ध होती है डेक्सामेथासोन दवा –

ब्रिटेन में कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए लाइफलाइन बनने वाली डेक्सामेथासोन दवा कम दामों पर आसानी से मिलने वाली दवाओं में से एक है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर पीटर होर्बी के मुताबिक डेक्सामेथासोन दवा महंगी नहीं होने के कारण विश्व भर के देशों में इसका प्रयोग किया जा सकता है। रिसर्च के क्‍लीनिकल ट्रायल हेड प्रोफेसर मार्टिन लैंड्रे के मुताबिक दवा को मात्र 10 दिनों तक संक्रमित मरीजों को दिया जाता है। भारत में इस दवाई के 10 दिनों के इस्तेमाल का खर्चा 481 रूपये है। बता दें कि इस समय देश में भी कुछ राज्यों में इसका प्रयोग किया जा रहा है।

WHO ने करी शोध की तारीफ –

ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की तारीफ करते हुए WHO के प्रमुख टेड्रोस एडहानोम गेब्रेयेसस ने कहा “हम डेक्सामेथासोन दवा पर हुए अध्ययन का स्वागत करते हैं। उन्होने कहा कि ये एक ऐसी दवा है जो कोरोना संक्रमित मरीजों की मृत्यु दर की संख्या में कमी लाने का कार्य करती है। खासकर ऐसे मरीज, जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत है या जो वेंटिलेटर पर हैं, उनके लिए यह किसी लाइफलाइन से कम नहीं। उन्होंने कहा कि हमें जीवन को बचाने और नए संक्रमण को फैलने से रोकने पर ध्यान देना होगा।

अब तक ये देश कर चुके हैं कोरोना वायरस की दवा बनाने का दावा –<