च्विंगम चबाने के फायदे और च्विंगम कैसे बनता है? : Chingam Kaise Banti Hai?
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Chingam kaise banti hai…च्विंगम की बात करें तो लगभग हम सभी ने इसे कभी न कभी जरूर चबाया होगा। च्विंगम चबाने के दौरान इसका बबल बनाने का मज़ा तो वही आपको बता सकता है। जिसने अपने बचपन के दिनों में यह काम खूब किया हो। अक्सर लोग शुरू में शौकिया तौर पर च्विंगम चबाना शुरू करते हैं। लेकिन धीरे-धीरे कई बार उन्हें इसकी लत भी लग जाती है। हालाँकि च्विंगम चबाना कोई बुरी बात नहीं लेकिन इसे अपनी लत बना लेना अच्छा नहीं होता। देखा जाए तो बच्चों को च्विंगम चबाने का बेहद शौक होता है। लेकिन बहुत छोटे बच्चों को च्विंगम नहीं देना चाहिए कई बार वे लोग जाने-अनजाने में इसे निगल भी लेते हैं। यदि आप च्विंगम चबाते हैं तो आपके मन में भी कुछ इस प्रकार के सवाल जरूर आते होंगे जैसे – च्विंगम कैसे बनता है?(Chingam kaise banta hai), च्विंगम के फायदे क्या हैं? च्विंगम के नुकसान क्या हैं? इसलिए आजकल के इस आर्टिकल में हम चर्चा करेंगे च्विंगम चबाने के फायदे और नुकसान के ऊपर, साथ ही जानेंगे कैसे बनता है च्विंगम।

च्विंगम चबाने
courtesy google

च्विंगम कैसे बनता है (Chingam kaise banti hai) – How to make chewing gum in hindi

किसी भी फैक्ट्री में च्विंगम बनाने की प्रक्रिया कई चरणों के अंदर पूरी होती है। जिसके बारे में आपको सम्पूर्ण जानकारी उस फैक्ट्री में काम करने वाला व्यक्ति दे सकता है। हालाँकि च्विंगम के इतिहास पर नजर डालें तो 1840 के दशक में, जॉन कर्टिस ने राल को उबाल कर पहला कमर्शियल स्प्रूस ट्री गम विकसित किया। फिर इसे स्ट्रिप्स में काट गया जो कॉर्नस्टार्च में लेपित थे ताकि उन्हें एक साथ चिपके रहने से रोका जा सके। सन 1850 की शुरुआत में, कर्टिस ने पोर्टलैंड मेन में दुनिया की पहली चबाने वाली गम फैक्टरी का निर्माण किया था। आईये जानते हैं च्विंगम बनाने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है।

  • रेज़िन, मोम और इलास्टोमेर सहित तीन प्रमुख घटक गम बेस के अंदर शामिल होते हैं। जिसमें रेज़िन चबाने योग्य हिस्सा है। मोम गोंद को नरम करता है और इलास्टोमर्स लचीलापन बनाये रखता है।
  • च्विंगम को आर्टिफिसियल मिठास देने के लिए एरिथ्रिटोल, आइसोमाल्ट, मकई का सिरप, डेक्सट्रोज़, ग्लूकोज, मैनिटोल, सोर्बिटोल, ज़ाइलिटोल, माल्टिटोल और लैक्टिटोल का प्रयोग किया जाता है।
  • इसमें नमी बनाये रखने के लिए ग्लिसरीन का प्रयोग किया जाता है।
  • इसकी सॉफ्टनेस, लचीलेपन को बनाये रखने और ब्रिटेलनेस को कम करने के लिए लेसितिण, हाइड्रोजनेटेड वेजिटेबल ऑयल, ग्लिसरॉल एस्टर, लानौलिन, मिथाइल एस्टर, पेंटाएरीथ्रीटोल एस्टर, राइस ब्रान वैक्स, स्टीरिक एसिड, सोडियम और पोटैशियम स्टीयरेट्स का प्रयोग किया जाता है।
  • च्विंगम को स्वाद देने के लिए चिंगम इसमें कई चीजों को मिलाया जा सकता है। जैसे पेपरमिंट, साइट्रिक, टार्टरिक, मैलिक, लैक्टिक, और फ्यूमरिक एसिड।
  • इसकी कठोरता बनाये रखने के लिए पॉलोल कोटिंग की जाती है। च्विंगम की गुणवकता को बनाए रखने के लिए सोर्बिटोल, मल्टीटॉल, आइसोमाल्ट, मांनिटल ,स्टार्च जैसी चीजों का प्रयोग किया जाता है।
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च्विंगम के फायदे (Chewing gum ke fayde) – Chewing gum benefits in hindi

च्विंगम चबाने से मुँह की एक्ससाइज हो जाती है। यह फेस मसल्स को मजबूत करने का काम करता है। यदि आपको डबल चीन की समस्या है तो नियमित रूप से च्विंगम जरूर चबाएं।

ओरल हेल्थ के लिए भी च्विंगम के फायदे (Chewing gum benefits in hindi) लिए जा सकते हैं। यह दांतों में जमे हुए खाने को बहार निकालने का कार्य करता है और आपके दांतों की सफाई करता है। यह दांतों की सफाई कर उन्हें सड़ने, कैविटी और प्लाक की समस्या से बचाने का कार्य करता है।

(Chewing gum benefits in hindi) च्विंगम चबाने के फायदे की बात करें तो यह अलर्टनेस को बढ़ाने का काम भी करता है। इसे चबाने से दिमाग में रक्त संचार तेजी से होने लगता है। जिससे मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन मिलने लगती है और आपकी अलर्टनेस बढ़ती है।

च्विंगम चबाने से मुँह में सलाइवा का पर्याप्त मात्रा में निर्माण होता है जो ओरल हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है। साथ ही इसे चबाकर मुँह की दुर्गंध से भी छुटकारा पाया जा सकता है।

स्मोकिंग की गंदी लत से छुटकारा पाने चाहते हैं तो इसके लिए आप खास तरीके से बने निकोटिन युक्त च्विंगम का प्रयोग कर सकते हैं। ये आपको धूम्रपान की गन्दी आदत से पीछा छुड़ाने में मदद करता है।

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च्विंगम के नुकसान – Chewing gum ke nuksan

  • शुगर फ्री च्विंगम आपके जबड़ों और दांतों की क्षति का कारण बन सकता है।
  • अधिक मात्रा में च्विंगम चबाने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल की समस्या पैदा हो सकती है।
  • च्विंगम का सेवन जंक फ़ूड खाने की इच्छा को बड़ा सकता है।

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