चीन को 4000 करोड़ का झटका, देश में लोकप्रिय हो रही मेड इन इंडिया राखी.
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अब से कुछ दिनों बाद रक्षा बंधन का पर्व आने वाला है और देश में इसकी तैयारी अब धूम धाम से शरू हो चुकी है। ये तो हम सभी जानते हैं कि रक्षा बंधन के इस पावन पर्व से पहले बाजार तरह-तरह की राखियों से सज जाती है। पिछले कुछ समय से भारतीय त्यौहार रक्षा बंधन पर्व के दौरान बाजार में चीनी फैंसी राखियों का काफी दबदबा देखने को मिला है। लेकिन इस बार माहौल बिल्कुल अलग नजर आ रहा है। भारत और चीन के बीच हुई हिंसक सीमा विवाद के बाद से देश भर में चाइनीज प्रोडक्ट्स का बहिष्कार किया जा रहा है। हाल ही में सरकार ने भी 59 चाइनीज ऐप्स पर सुरक्षा कारणों के चलते प्रतिबंध लगा दिया था। चाइनीज प्रोडक्ट्स के बहिष्कार का असर इस रक्षा बंधन पर्व पर भी देखने को मिल रहा है। इस बार भारतीय बाजार में स्वदेशी (मेड इन इंडिया) राखी ग्राहकों के बीच खूब लोकप्रिय हो रही हैं। भारत में बनाई जा रही ये मेड इन इंडिया राखी लॉकडाउन के करण नौकरी खो चुके लोगों को रोजगार दिलाने का काम तो कर ही रही हैं साथ ही यह चीन को आर्थिक नुकसान पहुंचा रही हैं। इस रक्षा बंधन पर आप भी मेड इन इंडिया राखी की खरीदारी कर प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल नारे को सफल बनाने में अपना योगदान दें।

मेड इन इंडिया राखी
courtesy google

इस रक्षा बंधन वोकल फॉर लोकल पर रहेगा फोकस
रक्षा बंधन के इस त्यौहार पर भारत का फोकस वोकल फॉर लोकल पर रहेगा। इसके तहत देश के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने में स्वदेशी मेड इन इंडिया राखी बाजार में उपलब्ध करवाई जाएँगी। देश भर में चल रहे चाइनीज प्रोडक्ट्स का बहिष्कार के अंतर्गत इस साल चाइनीज राखियां ना ही खरीदी जाएंगी और ना ही बेची जाएंगी। देश में इस बार मेड इन इंडिया राखी को बाजार में उपलब्ध करवाने के लिए शहरों और गावों में ऐसे लोगों को राखी बनाने की ट्रेनिंग उपलब्ध करवाई जा रही है जिनका रोजगार लॉकडाउन के चलते बंद हो गया हो। इन लोगों में दिहाड़ी मजदूरी करने वालों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं शामिल हैं।

देशभर के व्यापारियों ने लिया चीनी राखियों के बहिष्कार का निर्णय
देश में चीनी राखियों का बहिष्कार करने के लिए कैट (Confederation Of All India Traders) ने निर्णय लिया है कि इस साल ना तो देश में चीनी राखियां आएंगी और ना ही इन राखियां को बनाने का सामान आएगा। इसके अलावा कैट के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक इस बार देश मे कोई भी व्यापारी चीन की राखी या राखी बनाने वाला समान नहीं खरीदेगा। जो व्यापारी राखी का काम करते हैं वो अपने इलाके में लोगों को रोजगार देकर भारत में ही राखी बनवाएंगे। बता दें कि हर साल चीन का भारत में राखी का कारोबार 4000 करोड़ रुपये अधिक का रहता था।

यहाँ बनने लगी हैं देसी राखियां
चीन के बहिष्कार के तहत भारत के अलग अलग क्षेत्रों में राखी निर्माण का कार्य शरू हो चूका है। इस समय देश में राजधानी दिल्ली के अलावा नागपुर, तिनसुकिया, गुवाहाटी, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई, ग्वालियर, सूरत, वाराणसी, झांसी, इलाहबाद, कानपुर, भोपाल, जम्मू , बंगलौर, अहमदाबाद, रायपुर, भुवनेश्वर, कोल्हापुर, लखनऊ आदि शहरों में राखियां बनवा कर व्यापारियों तक पहुंचाने का काम शुरू हो चूका है।

अलीबाबा ग्रुप ने समेटा कारोबार बंद किये भारत के यूसी ब्राउजर और यूसी न्यूज ऑफिस।

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